सन्देश मेरे बच्चों के नाम
कदम और भी चलना हैं
न हो जाना मशगूल इन अवकाशों में
काम और भी करना है
कब क्या हो जाए, कैसी आपदा आ जाए
हमें इस बीते वर्ष 2020 ने सिखाया है
रहो चौकस, खुद पर निगरानी थामो,परखो किस संस्कार ने हमें अब तक रुलाया है
गर कुछ ऐसी हो हम में कमजोरी
तो शीघ्रता से उखाड़ दो
कुछ नया हुनर ,कुछ नई विद्या का अभ्यास करो
सिर्फ अपना शहर और संस्था नहीं, भारत राष्ट्र का ऊंचा नाम करो
निःस्वार्थ प्रेम और दिव्य समर्पण बद्ध बनो
सिर्फ गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस नहीं,, देश के हर शहीद का हर क्षण बलिदान याद रखो
क्षणिक सुकून और खुदगर्ज़ी त्यागो
और सुघड़ सुमनन्त भविष्य निर्माण करो
हाँ, और जब-जब अड़चन कोई मार्ग में आए , न झिझको, न खीझो, न निराशा से कोई सरोकार रखो
अदम्य ऊर्जा, विश्वास और सत्य के
आयामों को निस-दिन आंगीकर करो
और सदैव अपने मात-पितागुरु जनों का हृदय से सम्मान कर, उनके स्वप्नों को साकार करो।।
Comments
Post a Comment