विचार

 विचार विचार विचार, जहां देखो वहां विचार, जिसे देखो उसे विचार और जब देखो तब विचार।   खेल ये सारे, विचार सहारे, हम बेचारे विचार के मारे।                                            विचार उठाएं, विचार गिराऐं, कैसे कैसे खेल दिखाएं

विचार शून्य यहां कोई ना पाया, हम सबको इस विचार ने खूब भटकाया, जो दिख रहे विचार हीन वह भी अती की परिणति है ,जो बन गए हैं निर्विचार वह भी अति की गति है ,

आएं करें हम बेठ विचार, क्या है आखिर यह चीज विचार?

 क्यों है इसका हाहाकार ?क्यों नहीं घटता इसका अंधकार ?

 मूल जगत से ब्रह्म सहस्त्रार, निष्प्राण बनाया इसने संसार,

 आए करें अब भूल सुधार।

रह ना जाए कोई दरकार, है बीच पड़ी जो नैया मझधार,आओ लगाएं हम मिलकर पार, बन खिलें हम सुमन सुवास,आओ सजाएं हम प्रभु दरबार।।

 कब तक बागों के पुष्प हो अर्पण ?आखिर कब होगा स्वयं समर्पण ?निज मे लाएं अब यही विचार आओ करें हम भूल सुधार।।

 मन मस्तिष्क की महिमा जानें, प्रारब्ध पौरुष का अंतर पहचानें, ना करें भाग्य पर करुण विलाप ,आएं करें हम भूल सुधार ।।

 ज्ञान शक्ति युक्त हर् क्षण बनाएं, हम विश्व विजय का परचम लहराऐं, सीमित सत्ता को दें फेंक उतार ,

आओ करें हम भूल सुधार।।

 हर्षित हो हम झूमे गाएं, शिव संग जयोत चलो जगाएं, दें पुनः असीम को अनंत विस्तार ,आओ करें हम भूल सुधार।।

 सोते खाते युग बिताए, ना आया जेहन में यह विचार ,कैसे जीतें इस विचार प्रपंच को ? कैसे सफल हो यह आत्म सुधार ? इसको छोड़ा उसको थामा, नित्य चला बस यही कारोबार ,

अब तो करें हम भूल सुधार ।। 

आएं रमें हम एक ही धुन में, जिससे सारा है यह जग प्रसार,   क्षूद्र और जड़ कि आसक्ति त्यागें, जिसने किया हमें बर्बाद, मिटाएं अहंता , जगाऐं अनंतता, अणु में विष्णु का हो व्यवहार, आओ करें हम भूल सुधार।।

 दैवीय आलोक बन करें उजाला और बनें हम शिव सम निर्लिप्त- निराला,                                                            भरें हृदयों में अदम्य उत्साह, आऐं करें हम भूल सुधार।।

चिंतन कर पाओगे जब, खुद को लाचार तब रह जाएगा सिर्फ एक उपचार-विचार विचार विचार।

यह विचार है ऐसी तलवार जिसे मिलती 'एकाग्रता' से  ही धार ।दिशा बदल हम अब दें ऋण उतार, 

आओ करें हम भूल सुधार।।

✍️ चेतना तिवारी

नैदानिक मनोवैज्ञानिक

शिक्षाविद्

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