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विचार

 विचार विचार विचार, जहां देखो वहां विचार, जिसे देखो उसे विचार और जब देखो तब विचार।   खेल ये सारे, विचार सहारे, हम बेचारे विचार के मारे।                                            विचार उठाएं, विचार गिराऐं, कैसे कैसे खेल दिखाएं विचार शून्य यहां कोई ना पाया, हम सबको इस विचार ने खूब भटकाया, जो दिख रहे विचार हीन वह भी अती की परिणति है ,जो बन गए हैं निर्विचार वह भी अति की गति है , आएं करें हम बेठ विचार, क्या है आखिर यह चीज विचार?  क्यों है इसका हाहाकार ?क्यों नहीं घटता इसका अंधकार ?  मूल जगत से ब्रह्म सहस्त्रार, निष्प्राण बनाया इसने संसार,  आए करें अब भूल सुधार। रह ना जाए कोई दरकार, है बीच पड़ी जो नैया मझधार,आओ लगाएं हम मिलकर पार, बन खिलें हम सुमन सुवास,आओ सजाएं हम प्रभु दरबार।।  कब तक बागों के पुष्प हो अर्पण ?आखिर कब होगा स्वयं समर्पण ?निज मे लाएं अब यही विचार आओ करें हम भूल सुधार।।  मन मस्तिष्क की महिमा जानें, प्रारब्ध पौरुष का अंतर पहचानें, ...

सन्देश मेरे बच्चों के नाम

 अभी किया एक मुकाम ही पार तुमने, कदम और भी चलना हैं न हो जाना मशगूल इन अवकाशों में काम और भी करना है कब क्या हो जाए, कैसी आपदा आ जाए हमें इस बीते वर्ष 2020 ने सिखाया है रहो चौकस, खुद पर निगरानी थामो,परखो किस संस्कार ने हमें अब तक रुलाया है गर कुछ ऐसी हो हम में कमजोरी तो शीघ्रता से उखाड़ दो कुछ नया हुनर ,कुछ नई विद्या का अभ्यास करो सिर्फ अपना शहर और संस्था नहीं, भारत राष्ट्र का ऊंचा नाम करो निःस्वार्थ प्रेम और दिव्य समर्पण बद्ध बनो सिर्फ गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस नहीं,, देश के हर शहीद का हर क्षण बलिदान याद रखो क्षणिक सुकून और खुदगर्ज़ी त्यागो और सुघड़ सुमनन्त भविष्य निर्माण करो हाँ, और जब-जब अड़चन कोई मार्ग में आए , न झिझको, न खीझो, न निराशा से कोई सरोकार रखो अदम्य ऊर्जा, विश्वास और सत्य के आयामों को निस-दिन आंगीकर करो और सदैव अपने मात-पितागुरु जनों का हृदय से सम्मान कर, उनके स्वप्नों को साकार करो।। - चेतना तिवारी (मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद्द )

Riya,Sushant and now Sameer...What you people are proving? Why so weak? Why so nervoused? Raise up.Introspect your inner conscience every day and every minute if required,but plz don't leave your weapons amidst the challenges coming in life..

इंद्राणी ने इंद्र को बांधा था सूत्र पहला, खुद की नहीं इंद्र की सुरक्षा के हित, आज देखिये कैसा क्या हाल हुआ है,, ऋषियों ने सोच विचार कर किया यह प्रबंध, बहनों की रक्षा का ज़िम्मा भाइयों के हाथों में सौंप दिया है, इससे हुआ कमाल यह भी, की संस्कारों का समाज में कुछ तो बचाव हुआ, ये भी किसी की बहन है, यह सोचकर कई पशुओं का दिल नर्म हुआ, बहन होकर भी किसी की बहन का जो सम्मान न करे, समझ लीजिए कि इंसान के नाम पर कलंक उस पिशाच का नामोनिशान न रहे।। राखी पर्व की सभी देशवासियों को मेरी अनंत शुभकामनाएं।।