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विचार

 विचार विचार विचार, जहां देखो वहां विचार, जिसे देखो उसे विचार और जब देखो तब विचार।   खेल ये सारे, विचार सहारे, हम बेचारे विचार के मारे।                                            विचार उठाएं, विचार गिराऐं, कैसे कैसे खेल दिखाएं विचार शून्य यहां कोई ना पाया, हम सबको इस विचार ने खूब भटकाया, जो दिख रहे विचार हीन वह भी अती की परिणति है ,जो बन गए हैं निर्विचार वह भी अति की गति है , आएं करें हम बेठ विचार, क्या है आखिर यह चीज विचार?  क्यों है इसका हाहाकार ?क्यों नहीं घटता इसका अंधकार ?  मूल जगत से ब्रह्म सहस्त्रार, निष्प्राण बनाया इसने संसार,  आए करें अब भूल सुधार। रह ना जाए कोई दरकार, है बीच पड़ी जो नैया मझधार,आओ लगाएं हम मिलकर पार, बन खिलें हम सुमन सुवास,आओ सजाएं हम प्रभु दरबार।।  कब तक बागों के पुष्प हो अर्पण ?आखिर कब होगा स्वयं समर्पण ?निज मे लाएं अब यही विचार आओ करें हम भूल सुधार।।  मन मस्तिष्क की महिमा जानें, प्रारब्ध पौरुष का अंतर पहचानें, ...